16 February

Decreasing Dependency on Dollar

वैश्विक आर्थिक बदलाव और डॉलर पर घटती निर्भरता: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़े परिवर्तन देखने को मिले हैं। विशेष रूप से, पिछले एक वर्ष में अमेरिकी डॉलर के मूल्य में गिरावट, भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और बढ़ती महंगाई ने कई देशों को अपनी मौद्रिक रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। आज कई देश संयुक्त राज्य अमेरिका के डॉलर पर निर्भरता कम कर रहे हैं और सोने व वैकल्पिक परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहे हैं।

1. डॉलर के कमजोर होने के प्रमुख कारण

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(क) अत्यधिक मुद्रास्फीति और ब्याज दरें : अमेरिका में बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फेडरल रिज़र्व सिस्टम ने लगातार ब्याज दरें बढ़ाईं। इससे अल्पकाल में डॉलर मजबूत हुआ, लेकिन दीर्घकाल में आर्थिक दबाव बढ़ा।

(ख) बढ़ता सरकारी कर्ज : अमेरिका पर बढ़ता कर्ज वैश्विक निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है, जिससे ट्रेज़री बॉन्ड की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।

(ग) वैश्विक अस्थिरता और युद्ध : रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व संकट और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव ने वैश्विक व्यापार को अस्थिर किया।

 

2. देशों द्वारा डॉलर और ट्रेज़री बॉन्ड से दूरी

(क) विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव : कई देश अपने भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी घटा रहे हैं और सोना, यूरो व अन्य मुद्राओं को शामिल कर रहे हैं। चीन और रूस ने डॉलर आधारित लेन-देन कम किया है।भारत भी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा दे रहा है।

(ख) ब्रिक्स देशों की भूमिका : ब्रिक्स देश वैकल्पिक भुगतान प्रणाली और साझा मुद्रा की संभावना पर काम कर रहे हैं।

 

3. सोने की ओर बढ़ता रुझान

(क) सुरक्षित निवेश (Safe Haven) : सोना सदियों से संकट के समय सुरक्षित संपत्ति माना जाता रहा है।

(ख) केंद्रीय बैंकों की रणनीति : कई केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार बढ़ा रहे हैं ताकि डॉलर जोखिम को संतुलित किया जा सके।

(ग) संस्थागत समर्थन : अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक भी मौद्रिक स्थिरता में विविधता पर जोर देते हैं।

 

4. डिजिटल करेंसी / आभासी मुद्रा का उदय : डिजिटल युग में क्रिप्टोकरेंसी और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) तेजी से उभर रही हैं।

लाभ जोखिम
  • तेज़ और सस्ता अंतरराष्ट्रीय लेन-देन
  • बैंकिंग सिस्टम पर निर्भरता कम
  • तकनीकी पारदर्शिता (ब्लॉकचेन)
  • अत्यधिक मूल्य उतार-चढ़ाव
  • साइबर सुरक्षा खतरे
  • सरकारी नियंत्रण की कमी

 

5. सोना, डिजिटल मुद्रा और प्रॉपर्टी में निवेश का तुलनात्मक अध्ययन

  • निवेश माध्यम स्थिरता जोखिम तरलता दीर्घकालिक सुरक्षा
  • सोना उच्च कम मध्यम बहुत अच्छी
  • डिजिटल मुद्रा कम बहुत अधिक उच्च अनिश्चित
  • जमीन/प्रॉपर्टी मध्यम मध्यम कम अच्छी
  • डॉलर/बॉन्ड घटती मध्यम उच्च सीमित

 

6. जमीन/प्रॉपर्टी बनाम अन्य निवेश

(क) प्रॉपर्टी के लाभ (ख) सीमाएं
  • भौतिक संपत्ति
  • नियमित किराया आय
  • महंगाई से सुरक्षा
  • कम तरलता
  • कानूनी जटिलताएं
  • रख-रखाव खर्च

 

7. यूरोपीय दृष्टिकोण : यूरोप में यूरोपीय सेंट्रल बैंक भी डॉलर पर निर्भरता कम करने और क्षेत्रीय मुद्रा को मजबूत करने पर काम कर रहा है।

 

8. भविष्य की वैश्विक आर्थिक दिशा : आने वाले वर्षों में-

  • डॉलर का पूर्ण वर्चस्व कम होगा
  • बहु-मुद्रा प्रणाली विकसित होगी
  • सोना और रियल एसेट्स का महत्व बढ़ेगा
  • डिजिटल करेंसी मुख्यधारा में आएगी
  • विश्व अब “एक मुद्रा आधारित व्यवस्था” से “बहु-आधारित व्यवस्था” की ओर बढ़ रहा है।

 

निष्कर्ष

  • वर्तमान आर्थिक, राजनीतिक और युद्धजनित परिस्थितियों में:
  • देश डॉलर पर निर्भरता घटा रहे हैं
  • सोने और वैकल्पिक परिसंपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं
  • डिजिटल करेंसी भविष्य की दिशा तय कर रही है
  • जमीन/प्रॉपर्टी अभी भी सुरक्षित दीर्घकालिक निवेश बनी हुई है
  • आज के निवेशक और सरकारें जोखिम-विविधीकरण (Diversification) को सबसे महत्वपूर्ण रणनीति मान रही हैं। केवल एक माध्यम पर निर्भर रहना अब व्यावहारिक नहीं रहा है। 

 

                                                                                                                                                                          Written By: Sanjay Goswami

                                                                                                                                                                            (Specialist : Foreign Affairs)

 

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